Sunday, July 2, 2023

भिखारी से ब्यापारी बनने का सफर


 एक था भिखारी ! रेल सफ़र में भीख़ माँगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है, इससे भीख़ माँगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा। वह उस सेठ से भीख़ माँगने लगा।*


भिख़ारी को देखकर उस सेठ ने कहा, “तुम हमेशा मांगते ही हो, क्या कभी किसी को कुछ देते भी हो?”

भिखारी से ब्यापारी बनने का सफर

*भिख़ारी बोला, “साहब मैं तो भिख़ारी हूँ, हमेशा लोगों से मांगता ही रहता हूँ, मेरी इतनी औकात कहाँ कि किसी को कुछ दे सकूँ?”*


सेठ:- जब किसी को कुछ दे नहीं सकते तो तुम्हें मांगने का भी कोई हक़ नहीं है। मैं एक व्यापारी हूँ और लेन-देन में ही विश्वास करता हूँ, अगर तुम्हारे पास मुझे कुछ देने को हो तभी मैं तुम्हे बदले में कुछ दे सकता हूँ।


*तभी वह स्टेशन आ गया जहाँ पर उस सेठ को उतरना था, वह ट्रेन से उतरा और चला गया।*


इधर भिख़ारी सेठ की कही गई बात के बारे में सोचने लगा। सेठ के द्वारा कही गयीं बात उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह सोचने लगा कि शायद मुझे भीख में अधिक पैसा इसीलिए नहीं मिलता क्योकि मैं उसके बदले में किसी को कुछ दे नहीं पाता हूँ। लेकिन मैं तो भिखारी हूँ, किसी को कुछ देने लायक भी नहीं हूँ।लेकिन कब तक मैं लोगों को बिना कुछ दिए केवल मांगता ही रहूँगा।


*बहुत सोचने के बाद भिख़ारी ने निर्णय किया कि जो भी व्यक्ति उसे भीख देगा तो उसके बदले मे वह भी उस व्यक्ति को कुछ जरूर देगा। लेकिन अब उसके दिमाग में यह प्रश्न चल रहा था कि वह खुद भिख़ारी है तो भीख के बदले में वह दूसरों को क्या दे सकता है?*


इस बात को सोचते हुए दिनभर गुजरा लेकिन उसे अपने प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिला।


*दुसरे दिन जब वह स्टेशन के पास बैठा हुआ था तभी उसकी नजर कुछ फूलों पर पड़ी जो स्टेशन के आस-पास के पौधों पर खिल रहे थे, उसने सोचा, क्यों न मैं लोगों को भीख़ के बदले कुछ फूल दे दिया करूँ। उसको अपना यह विचार अच्छा लगा और उसने वहां से कुछ फूल तोड़ लिए।*


वह ट्रेन में भीख मांगने पहुंचा। जब भी कोई उसे भीख देता तो उसके बदले में वह भीख देने वाले को कुछ फूल दे देता। उन फूलों को लोग खुश होकर अपने पास रख लेते थे। अब भिख़ारी रोज फूल तोड़ता और भीख के बदले में उन फूलों को लोगों में बांट देता था।


*कुछ ही दिनों में उसने महसूस किया कि अब उसे बहुत अधिक लोग भीख देने लगे हैं। वह स्टेशन के पास के सभी फूलों को तोड़ लाता था। जब तक उसके पास फूल रहते थे तब तक उसे बहुत से लोग भीख देते थे। लेकिन जब फूल बांटते बांटते ख़त्म हो जाते तो उसे भीख भी नहीं मिलती थी,अब रोज ऐसा ही चलता रहा।*


एक दिन जब वह भीख मांग रहा था तो उसने देखा कि वही सेठ ट्रेन में बैठे है जिसकी वजह से उसे भीख के बदले फूल देने की प्रेरणा मिली थी।


*वह तुरंत उस व्यक्ति के पास पहुंच गया और भीख मांगते हुए बोला, आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल हैं, आप मुझे भीख दीजिये बदले में मैं आपको कुछ फूल दूंगा।*


सेठ ने उसे भीख के रूप में कुछ पैसे दे दिए और भिख़ारी ने कुछ फूल उसे दे दिए। उस सेठ को यह बात बहुत पसंद आयी।


*सेठ:- वाह क्या बात है..? आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गए हो, इतना कहकर फूल लेकर वह सेठ स्टेशन पर उतर गया।*


लेकिन उस सेठ द्वारा कही गई बात एक बार फिर से उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह बार-बार उस सेठ के द्वारा कही गई बात के बारे में सोचने लगा और बहुत खुश होने लगा। उसकी आँखे अब चमकने लगीं, उसे लगने लगा कि अब उसके हाथ सफलता की वह चाबी लग गई है जिसके द्वारा वह अपने जीवन को बदल सकता है।


*वह तुरंत ट्रेन से नीचे उतरा और उत्साहित होकर बहुत तेज आवाज में ऊपर आसमान की ओर देखकर बोला, “मैं भिखारी नहीं हूँ, मैं तो एक व्यापारी हूँ..*


मैं भी उस सेठ जैसा बन सकता हूँ.. मैं भी अमीर बन सकता हूँ!


*लोगों ने उसे देखा तो सोचा कि शायद यह भिख़ारी पागल हो गया है, अगले दिन से वह भिख़ारी उस स्टेशन पर फिर कभी नहीं दिखा।*


एक वर्ष बाद इसी स्टेशन पर दो व्यक्ति सूट बूट पहने हुए यात्रा कर रहे थे। दोनों ने एक दूसरे को देखा तो उनमे से एक ने दूसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और कहा, “क्या आपने मुझे पहचाना?”


सेठ:- “नहीं तो ! शायद हम लोग पहली बार मिल रहे हैं।


*भिखारी:- सेठ जी.. आप याद कीजिए, हम पहली बार नहीं बल्कि तीसरी बार मिल रहे हैं।*


सेठ:- मुझे याद नहीं आ रहा, वैसे हम पहले दो बार कब मिले थे?


अब पहला व्यक्ति मुस्कुराया और बोला:


हम पहले भी दो बार इसी ट्रेन में मिले थे, मैं वही भिख़ारी हूँ जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया कि मुझे जीवन में क्या करना चाहिए और दूसरी मुलाकात में बताया कि मैं वास्तव में कौन हूँ।


*नतीजा यह निकला कि आज मैं फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी हूँ और इसी व्यापार के काम से दूसरे शहर जा रहा हूँ।*


आपने मुझे पहली मुलाकात में प्रकृति का नियम बताया था... जिसके अनुसार हमें तभी कुछ मिलता है, जब हम कुछ देते हैं। लेन देन का यह नियम वास्तव में काम करता है, मैंने यह बहुत अच्छी तरह महसूस किया है, लेकिन मैं खुद को हमेशा भिख़ारी ही समझता रहा, इससे ऊपर उठकर मैंने कभी सोचा ही नहीं था और जब आपसे मेरी दूसरी मुलाकात हुई तब आपने मुझे बताया कि मैं एक व्यापारी बन चुका हूँ। अब मैं समझ चुका था कि मैं वास्तव में एक भिखारी नहीं बल्कि व्यापारी बन चुका हूँ।


*भारतीय मनीषियों ने संभवतः इसीलिए स्वयं को जानने पर सबसे अधिक जोर दिया और फिर कहा -*


सोऽहं 

शिवोहम !!


समझ की ही तो बात है...

*भिखारी ने स्वयं को जब तक भिखारी समझा, वह भिखारी रहा | उसने स्वयं को व्यापारी मान लिया, व्यापारी बन गया |*

जिस दिन हम समझ लेंगे कि मैं कौन हूँ...

*अर्थात मैं भगवान का अंश हूॅ।*

फिर जानने समझने को रह ही क्या जाएगा ?

Saturday, April 16, 2022

अपना बिहार

 कल मेरे गृह जिले #बेगूसराय/बरौनी #बिहार का एक औद्योगिक शहर, में #पेप्सी का पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा #बॉटलिंग प्लांट का उद्घाटन इस राज्य के यशस्वी #मुख्यमंत्री #नितीशकुमार ने किया ।देखकर दिल झूम गया ।


याद है मुझे वर्ष 2005 तक का बिहार।

शाम ढलते ही घरों में बंद हो जाते थे ।

चारों ओर घुप्प अंधेरा ।कहीं-कहीं टिमटिमाते कुछ हल्की रोशनी के बल्ब ।

चारों ओर जेनरेटर से निकलते हुए धुएँ और कर्णभेदी आवाज़।

जेनरेटर का व्यवसाय पूरे चरम पर, लोग महीने की भुगतान पर एक पंखे और एक बल्ब का पोईंट लिया करते थे।उसी एक पंखे और एक बल्ब में बच्चे पढ़ते थे, पूरा घर सोया करता था।

बिजली आने का लोग इंतज़ार करते थे ताकि दूरदर्शन पर चित्रहार-समाचार का लुत्फ़ उठा सकें।

मुश्किल से पाँच से आठ घंटे दिन भर बिजली रहती थी।

एक ट्रैन्स्फ़ॉर्मर अगर जल गया तो कई दिनों तक ताड़ के पंखे एक दूसरे को बारी-बारी झलिए!


घर में रहिए तो भीषण गर्मी और अंधेरे में मच्छरों का आक्रमण, घर से बाहर जाएँ तो किड्नैप और अपहरण !

शाम को सूरज ढलने के बाद अपने जिले से महज़ १२० किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित पटना जाने की भी जुर्रत नहीं थी, कौन कब किधर किड्नैप कर ले, मार दे ।

राज्य के सारे उद्यमी, व्यवसायी राज्य से #पलायन कर सूरत, बडोदा , बम्बई, दिल्ली, कलकत्ता में अपनी नयी व्यवसाय शुरू कर चुके थे, जिनकी मजबूरी थी वे अपनी अगली पीढ़ी को बिहार से दूर रखना चाहते थे।

कई छोटे-मोटे उद्योग-धंधे बंद हो गए थे ।

बिहार के सारे बच्चों को सुरक्षित दिल्ली, अजमेर, ग्वालियर और देहरादून के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने भेज दिया गया था ।


बाहर हर तरफ़ सड़कों पर गड्ढे।

या यूँ कहिए गड्ढे ही सड़क थे ।

रोड पर ऐम्बैसडर, मारुति और ह्युंदई मोटर की कुछ गाड़ियाँ।

डर से कोई अच्छी कार तक ख़रीदने की जुर्रत नहीं कर सकते थे।कोई अच्छी गाड़ियों का शोरूम तक पटना में खोलने का दुस्साहस नहीं कर सकता था ।

वरना राजनेता की बेटियों की शादियों में इन गाड़ियों को उठा लिया जाएगा !

हत्या, अपहरण , अराजकता हर तरफ़।

न स्कूल, न कॉलेज, न अस्पताल।

गाँव में बिजली के खम्भे और ताड़ तक चुरा लिए गए।

कई गाँव में सालों बिजली गुम हो गयी थी।

एक जेनरेशन ने अपना पूरा बचपन घुप्प अंधकार और प्रचंड गर्मी में बिता दिया था।

हर तरफ़ गुंडागर्दी, अराजकता और अफरा-तफरी !

नरक के सामान अंधकार और अराजकता का बिहार !

जो किसी राजनीतिक विचारधारा , जाति या मजहब के ग़ुलाम नहीं, नूट्रल हैं ,उन्हें सब तुरंत याद आएगा !


मैं बिहार से बाहर रहता था।

लोग बिहारी कहकर दुत्कारते थे।

बिहार से बाहर इस देश के करोड़ों बिहारियों की न कोई इज्जत , न प्रतिष्ठा ।

‘बिहारी’ शब्द एक गाली थी और अब भी है, लेकिन पहले जैसी बुरी नहीं !

सामाजिक न्याय और झूठी धर्मनिरपेक्षता की आड़ में बिहारियों की असहनीय दयनीय स्थिति को लगातार तीन चुनावों में यहाँ की जनता ने सही साबित किया था।

१५ वर्ष लालूजी, उनका परिवार और राष्ट्रीय पार्टी कोंग्रेस ने साथ मिलकर बिहार को दुर्दशा और बदहाली की तरफ़ इतना धकेल दिया कि कई वर्ष लगेंगे पार पाने में !


तभी तंग और प्रताड़ित जनता ने सत्ता परिवर्तन कर समोसे से आलू निकाल दिया ।

#भाजपा , #लोजपा के समर्थन से #जदयू ने सरकार बनायी, 

नितीश कुमार सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री बने ।

लगभग १५ वर्षों के इनके शासन में पूरे राज्य में अप्रत्याशित तरक़्क़ी हुई ।

#पटना बिल्कुल बदल चुका है, हर तरफ़ #फ़्लाईओवर , बड़े-बड़े #मॉल, #सिनमा घर, #शोरूम्स , #सड़क पर दौड़ती हुई #मर्सेडीज़ और #BMWs!

#मल्टीप्लेक्स में रात दस से एक का लेट नाइट शो का आनंद लेते लोग ।

राज्य में हर तरफ़ #नैशनलहाइवे का चौड़ीकरण ।

सड़कें मस्त , रंग-बिरंगी चमचमाती दौड़ती गाड़ियाँ।

गंगा नदी पर कई #पूल ।

मेरे जिले #बेगूसराय में गंगा नदी पर एक और सड़क एवं रेल पूल, NH ३१ का चौड़ीकरण और कायाकल्प , #NTPC और #फ़र्टिलायज़र प्लांट का निर्माण,#IOC बरौनी की क्षमता में डेढ़ गुणी वृद्धि !

कल बिहार के #मुख्यमंत्री ने इस जिले में #पेप्सी का के विशाल बाटलिंग प्लांट का उद्घाटन किया।

#एथनॉल प्लांट का तीव्रता के साथ निर्माण चल रहा है ।

जिस तरफ़ देखिए कुछ न कुछ काम चल रहा है।

हाँ, राज्य में रोज़गार का सृजन नहीं हुआ है।

कैसे होगा ?

राज्य रसातल में था।

पुनर्निर्माण करने, विधिव्यवस्था दुरुस्त करने, जर्जर इन्फ़्रस्ट्रक्चर को दुरुस्त करने , विध्वंस का पुनर्निर्माण और सृजन में समय लगता है, औद्योगिक निवेश केलिये एक उपयुक्त वातावरण और संसाधन तैयार करने पड़ते हैं।

वह दिन दूर नहीं जब बिहार में उद्योग-धंधे, कल-कारख़ाने होंगे , कृषि में रेकर्ड पैदावार होगा !

औद्योगिक और कृषि क्रांति आएगी।

बिहारियों को बिहार में ही रोज़गार मिलेगा, बाहरी भी आकर इस राज्य में काम कर सकेंगे ।


कुछ लोग कहते हैं कि हमारे ज़िले में उद्योग-धंधे लगने से #लोकल लोगों को क्या फ़ायदा होगा ?

समझदारी की कमी है यहाँ पर ।

पहले तो हम सब #भारतीय हैं और वही हमारी पहचान है।

देश के किसी प्रांत में अगर कोई भी भारतीय कष्ट में है, बेरोज़गार है तो यह मेरे लिए दुःखद है।

सारे भारतीय लोकल हैं।


रही बात स्थानीय लोगों को होने वाले फ़ायदे को, तो फ़ायदे निम्नलिखित हैं-


१. स्थानीय लोगों को निश्चय ही रोज़गार मिलेगा अगर योग्यता है। #IOCबरौनी में देखिए शहर और अपने प्रांत के कितने लोग कार्य करते हैं ?


२. जब भी कोई उद्योग लगता है , तो उसके इर्द-गिर्द की ज़मीन /प्रॉपर्टी का रेट बढ़ जाता है, फ़ायदा स्थानीय लोगों को ही होता है।


३. इर्द-गिर्द कई छोटे-मोटे कल-कारख़ाने खुल जाते हैं।

IOC बरौनी की वजह से ज़िले में कितने लघु उद्योग लगे ?


४. उद्योग की वजह से नई दुकानें, मॉल, रेस्टौरंट, सिनमा हाल, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल खुलते हैं, कई लोगों को रोज़गार मिलता है, ज़िले का आर्थिक विकास होता है।


४.फ़ैक्टरी में कुछ न कुछ कार्य चलता रहता है। ज़िले के ठीकेदारों को काम मिलता है।अपने जिले में राष्ट्रीय स्तर के कई ठीकेदार हैं।अगर IOC बरौनी नहीं होता तो क्या ये होते?

इन बड़े ठीकेदारों ने कितने लोगों को रोज़गार दे रखा है? ये लोग स्थानीय हैं या विदेश से आए हैं ?


५. एक उद्योग लगने से न जाने कितने सैकड़ों परिवार को रोज़गार मिल जाता है।आर्थिक और सामाजिक क्रांति आती है।


६. एक IOC को देखिए, कितने लोग अपनी जीविका केलिये निर्भर हैं इसपर ?


७. यहाँ तक कि शहर का सबसे अच्छा विद्यालय जिसमें शहर के सारे महत्वपूर्ण लोगों के बच्चे पढ़ते हैं , IOC का ही है।


८. उद्योग की वजह से देश-दुनिया से लोगों का आनाजाना लगा रहता है। ट्रेन, बस की सर्विस और बेहतर होती है।

ऐसे शहरों मे एअरपोर्ट का निर्माण करने की भी बाध्यता होती है।#CMBihar #NitishKumar 


अतः मात्र एक उद्योग लगने से किसी शहर में आर्थिक क्रांति होती है, जीवन बेहतर होता है।

ख़ाली उस उद्योग में कितने लोकल लोगों को नौकरी मिली, यह एक गुमराह करने वाला प्रश्न है ।

सारे #भारतीयलोकल हैं।

वरना अगर #बम्बई में #राजठाकरे बिहारियों की पिटायी करते हैं तो ठीक ही करते हैं।

मुंबई भी लोकल को ही रोज़गार देगा और देश के बाक़ी सारे शहर भी , तो भारत कहाँ जाएगा ?

इस तरह की संकीर्ण भ्रामक सोच से बचिए।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत है और कोई भी भारतीय किसी भी प्रांत में रोज़गार कर सकता है।


बिहार बढ़ेगा ,भारत बढ़ेगा 


जय हिंद , जय बिहार ,जय भारत !

Saturday, October 23, 2021

जिंदगी में सक्सेसफुल बनने की कुछ जरुरी बाते

 

जिंदगी में सक्सेसफुल कैसे बने

successful life

जिंदगी में कोन नाम नहीं कमाना चाहता कोन व्यक्ति सक्सेसफुल (Successful) नहीं बनना चाहता लेकिन लाइफ में एक सक्सेसफुल इंसान बनना इतना आसान नहीं है उसके लिए आपको कड़ी मेहनत के साथ और भी बहोत सारी चीजों की जरुरत है तो आज हम आपको कुछ टिप्स देंगे जो हर सक्सेसफुल इंसान फोलो करता है आप भी इन टिप्स को जिंदगी में अपनाके एक महान और सक्सेसफुल इंसान बन सकते है (How to Be Successful in Life) .




                     एक सक्सेसफुल इंसान हमेसा हमें रूल्स और रेगुलेसन फॉलो करता है तभी वो इंसान जिंदगी में एक महान व्यक्ति बनता है कोई भी व्यक्ति एकदम से कुछ ही समय में महान सक्सेसफुल (Successful) इंसान नहीं बनता इसके लिए टाइम लगता है हार्ड वर्क करना होता है एक ही दिन में आप महान व्यक्ति नहीं बन सकते बहोत से लोग सोचते है की कास ऐसा कोई चमत्कार हो जाये और हम अमीर और के सक्सेसफुल इंसान बन जाये लेकिन ऐसा नहीं है तो चलिए हम आपको 5 टिप्स बताएँगे जिन्हें आप फॉलो कर सकते है और जिंदगी में एक सफल इंसान बन सकते है

जिंदगी में सक्सेसफुल (Successful) कैसे बने

1. जिंदगी में कभी हार न माने

अगर जिंदगी में आपको एक महान और सक्सेसफुल इंसान बनना है तो जिंदगी में कभी हार नहीं माने बहोत से लोग होते है जो जिंदगी में अनसक्सेसफुल (Unsuccessful) यानि असफल होने के बाद हार मान लेते है दुबारा कोसिस नहीं करते ये सबसे बड़ी गलती है एक सक्सेस इन्सान कभी हार नहीं मान चाहे जिंदगी में वो कितनी बार भी फ़ैल हो कोसिस करते रहे कभी न कभी जरुर जिंदगी में सफल होगे ये सबसे बड़ा मूल मंत्र है जिंदगी में सक्सेसफुल (Successful) होने के लिए

never give up

2. कीमती समय बर्बाद न करे

अक्सर लोग जिंदगी में टाइम पास करते है समय बर्बाद करते है फालतू चीजों में यही समय अगर जिंदगी की राह में जिसे आप पाना कहते है उस पर लगाये तो कितने अच्छा होगा सायद ये आप नहीं जानते होगे , अगर आप को भी आलस आता है पढने का मन नहीं करता  और सारा टाइम फालतू चीजों में समय व्यतीत करते है तो आप जिंदगी में  सक्सेसफुल(Successful) नहींन सकते इशलिये अपने कीमती समय को बर्बाद न करे हमेशा इस समय को कुछ कामो में लगाये जरुर जिंदगी में एक सफल व्यक्ति बनोगे

successful

3.खुद पर हमेशा भरोसा रखे

जिंदगी में सक्सेसफुल होना के एक मूलमंत्र है खुद के ऊपर भरोसा होना अगर आपको खुद के ऊपर भरोसा है तो आप जिंदगी में कोई भी मुकाम हासिल कर सकते है कोई राह मुस्किल नहीं है अगर आप पहले ही सोच लेते हो की ये काम मुझ से नहीं होगा फिर स्वयं भगवान भी आजाये तो वो काम आपसे नहीं करवा सकता, इसलिए जिंदगी में कुछ भी करो एक सक्सेसफुल(Successful) इंसान बन्ने के लिए हमेसा खुद पूरा पूरा विस्वास रखो हा ये काम तो बहोत आसान है मे जरुर करलूँगा ये काम आसान से तो आप सक्सेसफुल होने से कोई नहीं रोक सकता

never give up

4. हमेसा आगे बढ़ते रहे रुके नहीं

बहोत से लोग लाइफ में थोडा सा सक्सेस मिलने के बाद रुक जाते है आगे बढ़ने की कोसिस नहीं करते सोचते है इतना मिल गया काफी है लेकिन ये एक सक्सेसफुल इंसान की पहचान नहीं सक्सेसफुल इंसान हमेसा आगे बढ़ता रहता है कभी रुकता नहीं है इशलिये अगर लाइफ में एक महान इंसान बनना है तो हमेशा आगे बढ़ते रहे

keep growing

5. जिंदगी में हमेशा इमानदारी से मेहनत से आगे बढे

अगर लाइफ में एक सक्सेसफुल इंसान बनना है है तो हमेशा मेहनत और ईमानदारी पे ही भरोसा रखे बहोत से लोग जिंदगी में सक्सेसफुल (Successful) बन्ने के लिए शोर्टकट यानि की गलत तरीका अपनाते है और आप जानते ही है कोई भी गलत तरीका किसी भी इंसान को सक्सेसफुल नहीं बनता बल्कि एक गलत काम इंसान की पूरी जिंदगी बर्बाद करदेता है इशलिये सक्सेसफुल बन्ने के लिए हमेसा सही और मेहनत की राह पे ही चलती सफलता आपके कदम चूमेगी

कहानिया हौसोलो की


                            हौसला.                           




साहित्य, कला और फिल्मी दुनिया से जुड़ा एक साहित्यिक मंच


अक्तूबर 24 | 20


                       



              कहानिया  हौसोलो  की


(एक)


उसने कहा था



एक बार

उसने कहा था


क्या आपने कभी

मुरझाते हुए फूल को देखा है

कुछ देर चुपचाप मैं उसे देखता रहा

फिर मुस्कुराते हुए बोला


प्रेम में देखी गई कोई चीज

मुरझाती कहां है

बल्कि और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाती है

वह मुस्कुराई और पलट कर चली गई


तब से देख रहा हूं मैं उसे

पहले से और भी ज्यादा खूबसूरत है।।




(दो)


कभी-कभी


हर रोज की तरह

आज भी लगभग मध्यरात्रि हो चुकी है

एक निर्जीव की भांति

बैठा हूं मैं अपनी चारपाई पर

पैर लटकाए


सामने की आलमारी पर

कुछ बिखरी हुई किताबें हैं

जिनमें मैं अभी-अभी

उलझा हुआ था


घर के सभी सदस्य

लगभग नींद में होंगे

लेकिन मां,

अभी भी जाग रही है

वह बोलती कुछ नहीं है

बस देखती है बहुत ध्यान से

मेरी तरफ


और मैं,

बैठे बैठे ढूंढ रहा होता हूं

घर की उन तमाम समस्याओं का हल

जिन्हें मां और पिता जी

एक साथ बैठकर ढूंढा करते हैं

कभी-कभी!



(तीन)

एक बीस वर्षीय लड़का


वह उम्र के उस मोड़ पर

आ खड़ा है

जहां पर अनगिनत रास्ते हैं

वह पूरी तरह से भ्रमित है

उन पर चलने के लिए

उसके कदम डगमगा रहें हैं

उसका साथ नहीं दे रहे हैं।


वह एक घायल परिंदे की भांति

फड़फड़ा रहा है

उसे डर है

भविष्य की उन तमाम योजनाओं से

जिसे आये दिन तैयार करता है


उसके पास धीरज है, धैर्य है

लेकिन कहीं न कहीं व्याकुलता है

कुछ पाने की...


वह सपने देखता है

खुली हुई आंखों से

और उदास हो जाता है

वह जानता है कि

दुनियां कितनी बदल चुकी है

विगत कुछ वर्षों में ही


वह समझदार भी है और बहुत नासमझ भी

वह कविताएं लिखता है प्रेम पर

क्योंकि उसे मालूम है कि

प्रेम में रहकर ही अपनी भीतरी

और बाहरी दुनियां के

उजाड़ से बचा जा सकता है।।



(चार)


वो चाहती है



वो चाहती है कि

उसे अत्यधिक प्रेम करे कोई

ऐसे ही मीठे-मीठे सपनों में रहती खोई


किन्तु सपनों को वो बयां नहीं कर पाती

खामोशी उसे भीतर से बहुत सताती


वो चाहती है कि

मुझसे चैटिंग करे वह

लेकिन वो खुद डर रही है कि कहीं वह...


एहसासों को वो बता नहीं सकती है

केवल नजरों से इशारा करती है।।



(पांच)


उसने कहा



उसने कहा-

तुम कविताएं क्यों लिखते हो

मैंने कहा-

बस यूं ही


उसने कहा-

तुम आजकल बोलते बहुत कम हो

मैंने कहा-

लोग सुनना ही कहां चाहते हैं


उसने कहा-

मुझे तुम्हारे साथ कुछ वक्त बीताना है

मैंने कहा-

समय का अभाव है


इस बार

उसने कुछ नहीं बोला...


आखिर में,

जाते हुए मैंने सिर्फ इतना कहा

मैंने खुद को लिखा है अपने फेसबुक पटल पर

संभव हो तो देख लेना

मैं यकीन के साथ कह रहा हूं कि

जब कभी भी तुम, मुझे पढ़ते हुए

खुद से मिलोगे तो, मुस्कुराओगे जरुर।।



(छ:)


एक दिन


एक दिन

मैंने उससे कहा

अपने हजार बार

न कह पाने का दुःख


लेकिन वह

हर बार की तरह

चुप शान्त अडोल

आसमान की ओर

निहार रही थी


एक बार फिर मैं

उसकी आंखों में

अपनी आंखों से

उदासियों का आसमान

देख आया।।



(सात)


एक पागल


एक पागल लड़का

घंटों बैठा रहता है अपने कमरे में

उसका मन चारों दिशाओं में भटकता है

दीवारों से बतियाता है

किताबों के पन्ने पलटता है

कुछ नग्में गुनगुनाता है

बीते लम्हों को बुलाता है


कभी सुकून ढूंढता है

कभी बेचैन हो उठता है

धुकधुकी है छाती के भीतर

कुछ कह नहीं पाता

जाने अनजाने में उसे डर सा है

लाइफ के आगे डगर की


कुछ छोटे मोटे सपने बुनता है

खामोशियों को छुपाता है

फिर चेहरे पर मुस्कान लेकर

निकल पड़ता है अपने कमरे से

मतलबी दुनियां में।।



(आठ)


जानता हूं मैं


जानता हूं मैं

कि लगभग दृश्य अब

अदृश्य हो रहा है


न ईमानदारी में ईमानदारी है

न सच्चाई में अच्छाई है

न तसल्ली में तसल्ली है

न दुःख में दुःख


चालाकियां भी अब सारे आम नग्न हैं

बेईमानियां खुलेआम घूम रहीं हैं, पेट फुलाए

और चोर चौराहे पर कर रहा है घोषणा

कि वह चोर है


हत्यारे को अब

छिपने की जरूरत ही नहीं

यकीनन आपको भी

महसूस हो रहा होगा।।



                         °°°°°°°°°°°

Sunday, July 19, 2020

अपनी तुलना दूसरों से न करें

एक बार की बात है, किसी जंगल में एक कौवा रहता था, वो बहुत ही खुश था, क्योंकि उसकी ज्यादा इच्छाएं नहीं थीं। वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट था, लेकिन एक बार उसने जंगल में किसी हंस को देख लिया और उसे देखते ही सोचने लगा कि ये प्राणी कितना सुन्दर है, ऐसा प्राणी तो मैंने पहले कभी नहीं देखा! इतना साफ और सफेद। यह तो इस जंगल में औरों से बहुत सफेद और सुंदर है, इसलिए यह तो बहुत खुश रहता होगा।
 
कोवा हंस के पास गया और पूछा, भाई तुम इतने सुंदर हो, इसलिए तुम बहुत खुश होगे?
 
इस पर हंस ने जवाब दिया, हां मैं पहले बहुत खुश रहता था, जब तक मैंने तोते को नहीं देखा था। उसे देखने के बाद से लगता है कि तोता धरती का सबसे सुंदर प्राणी है। हम दोनों के शरीर का तो एक ही रंग है लेकिन तोते के शरीर पर दो-दो रंग है, उसके गले में लाल रंग का घेरा और वो सूर्ख हरे रंग का था, सच में वो बेहद खूबसूरत था। 
 
अब कौवे ने सोचा कि हंस तो तोते को सबसे सुंदर बता रहा है, तो फिर उसे देखना होगा।
 
कौवा तोते के पास गया और पूछा, भाई तुम दो-दो रंग पाकर बड़े खुश होगे?
 
इस पर तोते ने कहा, हां मैं तब तक खुश था जब तक मैंने मोर को नहीं देखा था। मेरे पास तो दो ही रंग हैं लेकिन मोर के शरीर पर तो कई तरह के रंग हैं।

अब कौवे ने सोचा सबसे ज्यादा खुश कौन है, यह तो मैं पता करके ही रहूंगा। इसलिए अब मोर से मिलना ही पड़ेगा। कौए ने मोर को जंगल में ढूंढा लेकिन उसे पूरे जंगल में एक भी मोर नहीं मिला और मोर को ढूंढते-ढूंढते वह चिड़ियाघर में पहुंच गया, तो देखा मोर को देखने बहुत से लोग आए हुए हैं और उसके आसपास अच्छी खासी भीड़ है।
 
सब लोगों के जाने के बाद कौवे ने मोर से पूछा, भाई तुम दुनिया के सबसे सुंदर जीव हो और रंगबिरंगे हो, तुम्हारे साथ लोग फोटो खिंचवा रहे थे। तुम्हें तो बहुत अच्छा लगता होगा और तुम तो दुनिया के सबसे खुश जीव होगे?
 
इस पर मोर ने दुखी होते हुए कहा, भाई अगर सुंदर हूं तो भी क्या फर्क पड़ता है! मुझे लोग इस चिड़ियाघर में कैद करके रखते हैं, लेकिन तुम्हें तो कोई चिड़ियाघर में कैद करके नहीं रखता और तुम जहां चाहो अपनी मर्जी से घूम-फिर सकते हो। इसलिए दुनिया के सबसे संतुष्ट और खुश जीव तो तुम्हें होना चाहिए, क्योंकि तुम आज़ाद रहते हो। कौवा हैरान रह गया, क्‍योंकि उसके जीवन की अहमियत कोई दूसरा बता गया।
 
दोस्तों, ऐसा ही हम लोग भी करते हैं। हम अपनी खुशियों और गुणों की तुलना दूसरों से करते हैं, ऐसे लोगों से जिनका रहन-सहन का माहौल हमसे बिलकुल अलग होता है। हमारी जिंदगी में बहुत सारी ऐसी चीज़ें होती हैं, जो केवल हमारे पास हैं, लेकिन हम उसकी अहमियत समझकर खुश नहीं होते। लेकिन दूसरों की छोटी ख़ुशी भी हमें बड़ी लगती है, जबकि हम अपनी बड़ी खुशियों को इग्नोर कर देते हैं।

Wednesday, June 24, 2020

🙏विश्व का सबसे अनोखा मुकदमा ,,,,और में ऐसे मुकदमे हर घर मे देखना भी चाहता हूं

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विश्व का सबसे अनोखा मुकदमा ,,,,
और में ऐसे मुकदमे हर घर मे देखना भी चाहता हूं

न्यायालय  में एक मुकद्दमा आया ,जिसने सभी को झकझोर दिया |अदालतों में प्रॉपर्टी विवाद व अन्य पारिवारिक विवाद के केस आते ही रहते हैं|        मगर ये मामला बहुत ही अलग किस्म का था|
       एक 70 साल के बूढ़े व्यक्ति ने ,अपने 80 साल के बूढ़े भाई पर मुकद्दमा किया था|
    मुकद्दमे का कुछ यूं था कि "मेरा 80 साल का बड़ा भाई ,अब बूढ़ा हो चला है ,इसलिए वह खुद अपना ख्याल भी ठीक से नहीं रख सकता |मगर मेरे मना करने पर भी वह हमारी 110 साल की मां की देखभाल कर रहा है |
      मैं अभी ठीक हूं, इसलिए अब मुझे मां की सेवा करने का मौका दिया जाय और मां को मुझे सौंप दिया जाय"।
        न्यायाधीश महोदय का दिमाग घूम गया और मुक़दमा भी चर्चा में आ गया| न्यायाधीश महोदय ने दोनों भाइयों को समझाने की कोशिश की कि आप लोग 15-15 दिन रख लो|
    मगर कोई टस से मस नहीं हुआ,बड़े भाई का कहना था कि मैं अपने  स्वर्ग को खुद से दूर क्यों होने दूँ |अगर मां कह दे कि उसको मेरे पास कोई परेशानी  है या मैं  उसकी देखभाल ठीक से नहीं करता, तो अवश्य छोटे भाई को दे दो।
      छोटा भाई कहता कि पिछले 40 साल से अकेले ये सेवा किये जा रहा है, आखिर मैं अपना  कर्तव्य कब पूरा करूँगा।
          परेशान  न्यायाधीश महोदय ने  सभी प्रयास कर लिये ,मगर कोई हल नहीं निकला|
       आखिर उन्होंने मां की राय जानने के लिए उसको बुलवाया और पूंछा कि वह किसके साथ रहना चाहती है|
      मां कुल 30 किलो की बेहद कमजोर सी औरत थी और बड़ी मुश्किल से व्हील चेयर पर आई थी|उसने दुखी दिल से कहा कि मेरे लिए दोनों संतान  बराबर हैं| मैं किसी एक के  पक्ष में फैसला सुनाकर ,दूसरे का दिल नहीं दुखा सकती|
 आप न्यायाधीश हैं , निर्णय करना आपका काम है |जो  आपका निर्णय होगा मैं उसको ही मान लूंगी।
             आखिर न्यायाधीश महोदय ने भारी मन से  निर्णय दिया कि न्यायालय छोटे भाई की भावनाओं से  सहमत है कि बड़ा भाई वाकई बूढ़ा और कमजोर है| ऐसे में मां की सेवा की जिम्मेदारी छोटे भाई को दी जाती है।
   फैसला सुनकर बड़ा भाई जोर जोर से रोने लगा कि इस बुढापे ने मेरे स्वर्ग को मुझसे छीन लिया |अदालत में मौजूद  न्यायाधीश समेत सभी रोने लगे।
        कहने का  तात्पर्य यह है कि अगर भाई बहनों में वाद विवाद हो ,तो इस स्तर का हो|
   ये क्या बात है कि 'माँ तेरी है' की लड़ाई हो,और पता चले कि माता पिता ओल्ड एज होम में रह रहे हैं |यह पाप  है।
   हमें इस मुकदमे से ये सबक लेना ही चाहिए कि माता -पिता का दिल दुखाना नही चाहिए।।

निवेदन है इस पोस्ट को  हर जगह सम्मान मिले इसलिए share जरूर कीजिये ....

Tuesday, June 9, 2020

कोरोना को लेकर WHO की चेतावनी, स्थिति बिगड़ रही है सावधान रहें

कोरोना वायरस के कमजोर पड़ने की आ रही खबरों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक चेतावनी जारी की है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा जारी किए गए चेतावनी के अनुसार दुनिया भर में कोरोना से स्थिती और बिगड़ रही है और सभी देशों को इससे सतर्क रहना चाहिए. 

 WHO ने कहा है कि अमेरिकी महाद्वीपों में कोरोना के मामलों में आये उछाले के बाद उसने एक दिन में अब तक के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किये हैं, जिससे पता चलता है कि स्थिति सुधरने के बजाए बिगड़ रही है. इसके साथ ही उसने कोरोना काल में हो रहे प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई है . वहीं प्रदर्शनकारियों से सावधानी बरतने का आग्रह किया है. 

जो देश स्थिति में सुधार का दावा कर रहे हैं उन्हें चेतावनी देते हुए WHO प्रमुख ने कहा कि 'आत्मसंतोष सबसे बड़ा खतरा है और दुनिया के अधिकांश लोग अभी भी जोखिम में हैं.  उन्होंने आगे कहा कि महामारी को छह महीने से अधिक हो चुके हैं, और अब जो स्थिति है उसे देखते हुए किसी भी देश के लिए यह समय पेडल से पैर हटाने का नहीं है.'