Saturday, October 23, 2021

जिंदगी में सक्सेसफुल बनने की कुछ जरुरी बाते

 

जिंदगी में सक्सेसफुल कैसे बने

successful life

जिंदगी में कोन नाम नहीं कमाना चाहता कोन व्यक्ति सक्सेसफुल (Successful) नहीं बनना चाहता लेकिन लाइफ में एक सक्सेसफुल इंसान बनना इतना आसान नहीं है उसके लिए आपको कड़ी मेहनत के साथ और भी बहोत सारी चीजों की जरुरत है तो आज हम आपको कुछ टिप्स देंगे जो हर सक्सेसफुल इंसान फोलो करता है आप भी इन टिप्स को जिंदगी में अपनाके एक महान और सक्सेसफुल इंसान बन सकते है (How to Be Successful in Life) .




                     एक सक्सेसफुल इंसान हमेसा हमें रूल्स और रेगुलेसन फॉलो करता है तभी वो इंसान जिंदगी में एक महान व्यक्ति बनता है कोई भी व्यक्ति एकदम से कुछ ही समय में महान सक्सेसफुल (Successful) इंसान नहीं बनता इसके लिए टाइम लगता है हार्ड वर्क करना होता है एक ही दिन में आप महान व्यक्ति नहीं बन सकते बहोत से लोग सोचते है की कास ऐसा कोई चमत्कार हो जाये और हम अमीर और के सक्सेसफुल इंसान बन जाये लेकिन ऐसा नहीं है तो चलिए हम आपको 5 टिप्स बताएँगे जिन्हें आप फॉलो कर सकते है और जिंदगी में एक सफल इंसान बन सकते है

जिंदगी में सक्सेसफुल (Successful) कैसे बने

1. जिंदगी में कभी हार न माने

अगर जिंदगी में आपको एक महान और सक्सेसफुल इंसान बनना है तो जिंदगी में कभी हार नहीं माने बहोत से लोग होते है जो जिंदगी में अनसक्सेसफुल (Unsuccessful) यानि असफल होने के बाद हार मान लेते है दुबारा कोसिस नहीं करते ये सबसे बड़ी गलती है एक सक्सेस इन्सान कभी हार नहीं मान चाहे जिंदगी में वो कितनी बार भी फ़ैल हो कोसिस करते रहे कभी न कभी जरुर जिंदगी में सफल होगे ये सबसे बड़ा मूल मंत्र है जिंदगी में सक्सेसफुल (Successful) होने के लिए

never give up

2. कीमती समय बर्बाद न करे

अक्सर लोग जिंदगी में टाइम पास करते है समय बर्बाद करते है फालतू चीजों में यही समय अगर जिंदगी की राह में जिसे आप पाना कहते है उस पर लगाये तो कितने अच्छा होगा सायद ये आप नहीं जानते होगे , अगर आप को भी आलस आता है पढने का मन नहीं करता  और सारा टाइम फालतू चीजों में समय व्यतीत करते है तो आप जिंदगी में  सक्सेसफुल(Successful) नहींन सकते इशलिये अपने कीमती समय को बर्बाद न करे हमेशा इस समय को कुछ कामो में लगाये जरुर जिंदगी में एक सफल व्यक्ति बनोगे

successful

3.खुद पर हमेशा भरोसा रखे

जिंदगी में सक्सेसफुल होना के एक मूलमंत्र है खुद के ऊपर भरोसा होना अगर आपको खुद के ऊपर भरोसा है तो आप जिंदगी में कोई भी मुकाम हासिल कर सकते है कोई राह मुस्किल नहीं है अगर आप पहले ही सोच लेते हो की ये काम मुझ से नहीं होगा फिर स्वयं भगवान भी आजाये तो वो काम आपसे नहीं करवा सकता, इसलिए जिंदगी में कुछ भी करो एक सक्सेसफुल(Successful) इंसान बन्ने के लिए हमेसा खुद पूरा पूरा विस्वास रखो हा ये काम तो बहोत आसान है मे जरुर करलूँगा ये काम आसान से तो आप सक्सेसफुल होने से कोई नहीं रोक सकता

never give up

4. हमेसा आगे बढ़ते रहे रुके नहीं

बहोत से लोग लाइफ में थोडा सा सक्सेस मिलने के बाद रुक जाते है आगे बढ़ने की कोसिस नहीं करते सोचते है इतना मिल गया काफी है लेकिन ये एक सक्सेसफुल इंसान की पहचान नहीं सक्सेसफुल इंसान हमेसा आगे बढ़ता रहता है कभी रुकता नहीं है इशलिये अगर लाइफ में एक महान इंसान बनना है तो हमेशा आगे बढ़ते रहे

keep growing

5. जिंदगी में हमेशा इमानदारी से मेहनत से आगे बढे

अगर लाइफ में एक सक्सेसफुल इंसान बनना है है तो हमेशा मेहनत और ईमानदारी पे ही भरोसा रखे बहोत से लोग जिंदगी में सक्सेसफुल (Successful) बन्ने के लिए शोर्टकट यानि की गलत तरीका अपनाते है और आप जानते ही है कोई भी गलत तरीका किसी भी इंसान को सक्सेसफुल नहीं बनता बल्कि एक गलत काम इंसान की पूरी जिंदगी बर्बाद करदेता है इशलिये सक्सेसफुल बन्ने के लिए हमेसा सही और मेहनत की राह पे ही चलती सफलता आपके कदम चूमेगी

कहानिया हौसोलो की


                            हौसला.                           




साहित्य, कला और फिल्मी दुनिया से जुड़ा एक साहित्यिक मंच


अक्तूबर 24 | 20


                       



              कहानिया  हौसोलो  की


(एक)


उसने कहा था



एक बार

उसने कहा था


क्या आपने कभी

मुरझाते हुए फूल को देखा है

कुछ देर चुपचाप मैं उसे देखता रहा

फिर मुस्कुराते हुए बोला


प्रेम में देखी गई कोई चीज

मुरझाती कहां है

बल्कि और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाती है

वह मुस्कुराई और पलट कर चली गई


तब से देख रहा हूं मैं उसे

पहले से और भी ज्यादा खूबसूरत है।।




(दो)


कभी-कभी


हर रोज की तरह

आज भी लगभग मध्यरात्रि हो चुकी है

एक निर्जीव की भांति

बैठा हूं मैं अपनी चारपाई पर

पैर लटकाए


सामने की आलमारी पर

कुछ बिखरी हुई किताबें हैं

जिनमें मैं अभी-अभी

उलझा हुआ था


घर के सभी सदस्य

लगभग नींद में होंगे

लेकिन मां,

अभी भी जाग रही है

वह बोलती कुछ नहीं है

बस देखती है बहुत ध्यान से

मेरी तरफ


और मैं,

बैठे बैठे ढूंढ रहा होता हूं

घर की उन तमाम समस्याओं का हल

जिन्हें मां और पिता जी

एक साथ बैठकर ढूंढा करते हैं

कभी-कभी!



(तीन)

एक बीस वर्षीय लड़का


वह उम्र के उस मोड़ पर

आ खड़ा है

जहां पर अनगिनत रास्ते हैं

वह पूरी तरह से भ्रमित है

उन पर चलने के लिए

उसके कदम डगमगा रहें हैं

उसका साथ नहीं दे रहे हैं।


वह एक घायल परिंदे की भांति

फड़फड़ा रहा है

उसे डर है

भविष्य की उन तमाम योजनाओं से

जिसे आये दिन तैयार करता है


उसके पास धीरज है, धैर्य है

लेकिन कहीं न कहीं व्याकुलता है

कुछ पाने की...


वह सपने देखता है

खुली हुई आंखों से

और उदास हो जाता है

वह जानता है कि

दुनियां कितनी बदल चुकी है

विगत कुछ वर्षों में ही


वह समझदार भी है और बहुत नासमझ भी

वह कविताएं लिखता है प्रेम पर

क्योंकि उसे मालूम है कि

प्रेम में रहकर ही अपनी भीतरी

और बाहरी दुनियां के

उजाड़ से बचा जा सकता है।।



(चार)


वो चाहती है



वो चाहती है कि

उसे अत्यधिक प्रेम करे कोई

ऐसे ही मीठे-मीठे सपनों में रहती खोई


किन्तु सपनों को वो बयां नहीं कर पाती

खामोशी उसे भीतर से बहुत सताती


वो चाहती है कि

मुझसे चैटिंग करे वह

लेकिन वो खुद डर रही है कि कहीं वह...


एहसासों को वो बता नहीं सकती है

केवल नजरों से इशारा करती है।।



(पांच)


उसने कहा



उसने कहा-

तुम कविताएं क्यों लिखते हो

मैंने कहा-

बस यूं ही


उसने कहा-

तुम आजकल बोलते बहुत कम हो

मैंने कहा-

लोग सुनना ही कहां चाहते हैं


उसने कहा-

मुझे तुम्हारे साथ कुछ वक्त बीताना है

मैंने कहा-

समय का अभाव है


इस बार

उसने कुछ नहीं बोला...


आखिर में,

जाते हुए मैंने सिर्फ इतना कहा

मैंने खुद को लिखा है अपने फेसबुक पटल पर

संभव हो तो देख लेना

मैं यकीन के साथ कह रहा हूं कि

जब कभी भी तुम, मुझे पढ़ते हुए

खुद से मिलोगे तो, मुस्कुराओगे जरुर।।



(छ:)


एक दिन


एक दिन

मैंने उससे कहा

अपने हजार बार

न कह पाने का दुःख


लेकिन वह

हर बार की तरह

चुप शान्त अडोल

आसमान की ओर

निहार रही थी


एक बार फिर मैं

उसकी आंखों में

अपनी आंखों से

उदासियों का आसमान

देख आया।।



(सात)


एक पागल


एक पागल लड़का

घंटों बैठा रहता है अपने कमरे में

उसका मन चारों दिशाओं में भटकता है

दीवारों से बतियाता है

किताबों के पन्ने पलटता है

कुछ नग्में गुनगुनाता है

बीते लम्हों को बुलाता है


कभी सुकून ढूंढता है

कभी बेचैन हो उठता है

धुकधुकी है छाती के भीतर

कुछ कह नहीं पाता

जाने अनजाने में उसे डर सा है

लाइफ के आगे डगर की


कुछ छोटे मोटे सपने बुनता है

खामोशियों को छुपाता है

फिर चेहरे पर मुस्कान लेकर

निकल पड़ता है अपने कमरे से

मतलबी दुनियां में।।



(आठ)


जानता हूं मैं


जानता हूं मैं

कि लगभग दृश्य अब

अदृश्य हो रहा है


न ईमानदारी में ईमानदारी है

न सच्चाई में अच्छाई है

न तसल्ली में तसल्ली है

न दुःख में दुःख


चालाकियां भी अब सारे आम नग्न हैं

बेईमानियां खुलेआम घूम रहीं हैं, पेट फुलाए

और चोर चौराहे पर कर रहा है घोषणा

कि वह चोर है


हत्यारे को अब

छिपने की जरूरत ही नहीं

यकीनन आपको भी

महसूस हो रहा होगा।।



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