अपना बिहार
कल मेरे गृह जिले #बेगूसराय/बरौनी #बिहार का एक औद्योगिक शहर, में #पेप्सी का पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा #बॉटलिंग प्लांट का उद्घाटन इस राज्य के यशस्वी #मुख्यमंत्री #नितीशकुमार ने किया ।देखकर दिल झूम गया ।
याद है मुझे वर्ष 2005 तक का बिहार।
शाम ढलते ही घरों में बंद हो जाते थे ।
चारों ओर घुप्प अंधेरा ।कहीं-कहीं टिमटिमाते कुछ हल्की रोशनी के बल्ब ।
चारों ओर जेनरेटर से निकलते हुए धुएँ और कर्णभेदी आवाज़।
जेनरेटर का व्यवसाय पूरे चरम पर, लोग महीने की भुगतान पर एक पंखे और एक बल्ब का पोईंट लिया करते थे।उसी एक पंखे और एक बल्ब में बच्चे पढ़ते थे, पूरा घर सोया करता था।
बिजली आने का लोग इंतज़ार करते थे ताकि दूरदर्शन पर चित्रहार-समाचार का लुत्फ़ उठा सकें।
मुश्किल से पाँच से आठ घंटे दिन भर बिजली रहती थी।
एक ट्रैन्स्फ़ॉर्मर अगर जल गया तो कई दिनों तक ताड़ के पंखे एक दूसरे को बारी-बारी झलिए!
घर में रहिए तो भीषण गर्मी और अंधेरे में मच्छरों का आक्रमण, घर से बाहर जाएँ तो किड्नैप और अपहरण !
शाम को सूरज ढलने के बाद अपने जिले से महज़ १२० किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित पटना जाने की भी जुर्रत नहीं थी, कौन कब किधर किड्नैप कर ले, मार दे ।
राज्य के सारे उद्यमी, व्यवसायी राज्य से #पलायन कर सूरत, बडोदा , बम्बई, दिल्ली, कलकत्ता में अपनी नयी व्यवसाय शुरू कर चुके थे, जिनकी मजबूरी थी वे अपनी अगली पीढ़ी को बिहार से दूर रखना चाहते थे।
कई छोटे-मोटे उद्योग-धंधे बंद हो गए थे ।
बिहार के सारे बच्चों को सुरक्षित दिल्ली, अजमेर, ग्वालियर और देहरादून के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने भेज दिया गया था ।
बाहर हर तरफ़ सड़कों पर गड्ढे।
या यूँ कहिए गड्ढे ही सड़क थे ।
रोड पर ऐम्बैसडर, मारुति और ह्युंदई मोटर की कुछ गाड़ियाँ।
डर से कोई अच्छी कार तक ख़रीदने की जुर्रत नहीं कर सकते थे।कोई अच्छी गाड़ियों का शोरूम तक पटना में खोलने का दुस्साहस नहीं कर सकता था ।
वरना राजनेता की बेटियों की शादियों में इन गाड़ियों को उठा लिया जाएगा !
हत्या, अपहरण , अराजकता हर तरफ़।
न स्कूल, न कॉलेज, न अस्पताल।
गाँव में बिजली के खम्भे और ताड़ तक चुरा लिए गए।
कई गाँव में सालों बिजली गुम हो गयी थी।
एक जेनरेशन ने अपना पूरा बचपन घुप्प अंधकार और प्रचंड गर्मी में बिता दिया था।
हर तरफ़ गुंडागर्दी, अराजकता और अफरा-तफरी !
नरक के सामान अंधकार और अराजकता का बिहार !
जो किसी राजनीतिक विचारधारा , जाति या मजहब के ग़ुलाम नहीं, नूट्रल हैं ,उन्हें सब तुरंत याद आएगा !
मैं बिहार से बाहर रहता था।
लोग बिहारी कहकर दुत्कारते थे।
बिहार से बाहर इस देश के करोड़ों बिहारियों की न कोई इज्जत , न प्रतिष्ठा ।
‘बिहारी’ शब्द एक गाली थी और अब भी है, लेकिन पहले जैसी बुरी नहीं !
सामाजिक न्याय और झूठी धर्मनिरपेक्षता की आड़ में बिहारियों की असहनीय दयनीय स्थिति को लगातार तीन चुनावों में यहाँ की जनता ने सही साबित किया था।
१५ वर्ष लालूजी, उनका परिवार और राष्ट्रीय पार्टी कोंग्रेस ने साथ मिलकर बिहार को दुर्दशा और बदहाली की तरफ़ इतना धकेल दिया कि कई वर्ष लगेंगे पार पाने में !
तभी तंग और प्रताड़ित जनता ने सत्ता परिवर्तन कर समोसे से आलू निकाल दिया ।
#भाजपा , #लोजपा के समर्थन से #जदयू ने सरकार बनायी,
नितीश कुमार सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री बने ।
लगभग १५ वर्षों के इनके शासन में पूरे राज्य में अप्रत्याशित तरक़्क़ी हुई ।
#पटना बिल्कुल बदल चुका है, हर तरफ़ #फ़्लाईओवर , बड़े-बड़े #मॉल, #सिनमा घर, #शोरूम्स , #सड़क पर दौड़ती हुई #मर्सेडीज़ और #BMWs!
#मल्टीप्लेक्स में रात दस से एक का लेट नाइट शो का आनंद लेते लोग ।
राज्य में हर तरफ़ #नैशनलहाइवे का चौड़ीकरण ।
सड़कें मस्त , रंग-बिरंगी चमचमाती दौड़ती गाड़ियाँ।
गंगा नदी पर कई #पूल ।
मेरे जिले #बेगूसराय में गंगा नदी पर एक और सड़क एवं रेल पूल, NH ३१ का चौड़ीकरण और कायाकल्प , #NTPC और #फ़र्टिलायज़र प्लांट का निर्माण,#IOC बरौनी की क्षमता में डेढ़ गुणी वृद्धि !
कल बिहार के #मुख्यमंत्री ने इस जिले में #पेप्सी का के विशाल बाटलिंग प्लांट का उद्घाटन किया।
#एथनॉल प्लांट का तीव्रता के साथ निर्माण चल रहा है ।
जिस तरफ़ देखिए कुछ न कुछ काम चल रहा है।
हाँ, राज्य में रोज़गार का सृजन नहीं हुआ है।
कैसे होगा ?
राज्य रसातल में था।
पुनर्निर्माण करने, विधिव्यवस्था दुरुस्त करने, जर्जर इन्फ़्रस्ट्रक्चर को दुरुस्त करने , विध्वंस का पुनर्निर्माण और सृजन में समय लगता है, औद्योगिक निवेश केलिये एक उपयुक्त वातावरण और संसाधन तैयार करने पड़ते हैं।
वह दिन दूर नहीं जब बिहार में उद्योग-धंधे, कल-कारख़ाने होंगे , कृषि में रेकर्ड पैदावार होगा !
औद्योगिक और कृषि क्रांति आएगी।
बिहारियों को बिहार में ही रोज़गार मिलेगा, बाहरी भी आकर इस राज्य में काम कर सकेंगे ।
कुछ लोग कहते हैं कि हमारे ज़िले में उद्योग-धंधे लगने से #लोकल लोगों को क्या फ़ायदा होगा ?
समझदारी की कमी है यहाँ पर ।
पहले तो हम सब #भारतीय हैं और वही हमारी पहचान है।
देश के किसी प्रांत में अगर कोई भी भारतीय कष्ट में है, बेरोज़गार है तो यह मेरे लिए दुःखद है।
सारे भारतीय लोकल हैं।
रही बात स्थानीय लोगों को होने वाले फ़ायदे को, तो फ़ायदे निम्नलिखित हैं-
१. स्थानीय लोगों को निश्चय ही रोज़गार मिलेगा अगर योग्यता है। #IOCबरौनी में देखिए शहर और अपने प्रांत के कितने लोग कार्य करते हैं ?
२. जब भी कोई उद्योग लगता है , तो उसके इर्द-गिर्द की ज़मीन /प्रॉपर्टी का रेट बढ़ जाता है, फ़ायदा स्थानीय लोगों को ही होता है।
३. इर्द-गिर्द कई छोटे-मोटे कल-कारख़ाने खुल जाते हैं।
IOC बरौनी की वजह से ज़िले में कितने लघु उद्योग लगे ?
४. उद्योग की वजह से नई दुकानें, मॉल, रेस्टौरंट, सिनमा हाल, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल खुलते हैं, कई लोगों को रोज़गार मिलता है, ज़िले का आर्थिक विकास होता है।
४.फ़ैक्टरी में कुछ न कुछ कार्य चलता रहता है। ज़िले के ठीकेदारों को काम मिलता है।अपने जिले में राष्ट्रीय स्तर के कई ठीकेदार हैं।अगर IOC बरौनी नहीं होता तो क्या ये होते?
इन बड़े ठीकेदारों ने कितने लोगों को रोज़गार दे रखा है? ये लोग स्थानीय हैं या विदेश से आए हैं ?
५. एक उद्योग लगने से न जाने कितने सैकड़ों परिवार को रोज़गार मिल जाता है।आर्थिक और सामाजिक क्रांति आती है।
६. एक IOC को देखिए, कितने लोग अपनी जीविका केलिये निर्भर हैं इसपर ?
७. यहाँ तक कि शहर का सबसे अच्छा विद्यालय जिसमें शहर के सारे महत्वपूर्ण लोगों के बच्चे पढ़ते हैं , IOC का ही है।
८. उद्योग की वजह से देश-दुनिया से लोगों का आनाजाना लगा रहता है। ट्रेन, बस की सर्विस और बेहतर होती है।
ऐसे शहरों मे एअरपोर्ट का निर्माण करने की भी बाध्यता होती है।#CMBihar #NitishKumar
अतः मात्र एक उद्योग लगने से किसी शहर में आर्थिक क्रांति होती है, जीवन बेहतर होता है।
ख़ाली उस उद्योग में कितने लोकल लोगों को नौकरी मिली, यह एक गुमराह करने वाला प्रश्न है ।
सारे #भारतीयलोकल हैं।
वरना अगर #बम्बई में #राजठाकरे बिहारियों की पिटायी करते हैं तो ठीक ही करते हैं।
मुंबई भी लोकल को ही रोज़गार देगा और देश के बाक़ी सारे शहर भी , तो भारत कहाँ जाएगा ?
इस तरह की संकीर्ण भ्रामक सोच से बचिए।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत है और कोई भी भारतीय किसी भी प्रांत में रोज़गार कर सकता है।
बिहार बढ़ेगा ,भारत बढ़ेगा
जय हिंद , जय बिहार ,जय भारत !

